गाले से सिडनी तक: 167 ने कैसे जोड़ा महेला, लक्ष्मण और पडिक्कल का डेब्यू शतक

महेला जयवर्धने, वीवीएस लक्ष्मण और देवदत्त पडिक्कल – तीनों ने अपने पहले टेस्ट शतक में ठीक 167 रन बनाए। जानें इन तीनों ऐतिहासिक पारियों की पूरी कहानी।

क्रिकेट में कुछ स्कोर ऐसे होते हैं जो किस्मत में लिखे लगते हैं। कुछ नंबर ऐसे होते हैं जो सिर्फ़ आंकड़ों से कहीं बढ़कर होते हैं और उनमें एक तरह का जादुई असर होता है। ऐसा ही एक नंबर 167 है। यह स्कोर तीन बहुत खास बल्लेबाजों के लिए है। दरअसल यह स्कोर उनके पहले टेस्ट शतक का स्कोर है।

इस लिस्ट पर नज़र डालें:

महेला जयवर्धने – 167 बनाम न्यूज़ीलैंड, गॉल में, 1998
वीवीएस लक्ष्मण – 167 बनाम ऑस्ट्रेलिया, सिडनी में, 2000
देवदत्त पडिक्कल – 167 बनाम इंग्लैंड, गॉल में, 2026


गाले  में डेब्यू 1998
 

जून 1998 में गाले इंटरनेशनल स्टेडियम में पहला टेस्ट मैच खेला जा रहा था। इस स्टेडियम की पिच को न्यूज़ीलैंड के कप्तान स्टीफन फ्लेमिंग ने "गोबर का ढेर" कहा था। एक ऐसी टूटती-फूटती और खतरनाक पिच जिस पर बैटिंग करना किसी बुरे सपने जैसा था। श्रीलंका सीरीज़ का पहला टेस्ट मैच हार चुका था और उन पर दबाव था।

तभी मैदान पर उतरे 21 साल के महेला जयवर्धने, जो अपना सिर्फ़ चौथा टेस्ट मैच खेल रहे थे। तीसरे नंबर पर बैटिंग करने आए जयवर्धने का सामना न्यूज़ीलैंड के स्पिन अटैक से हुआ, जिसकी कमान चालाक डेनियल विटोरी के हाथों में थी।

जयवर्धने ने एक अनुभवी खिलाड़ी की तरह शांत रहकर बैटिंग की और खूबसूरती के साथ 278 गेंदों पर 167 रन बनाए। यह गॉल में पहला टेस्ट शतक था। और यह जयवर्धने के करियर का भी पहला शतक था। 

सिडनी में VVS लक्षमण की शानदार पारी 2000

आपको बता दें कि जब VVS लक्ष्मण ने अपने करियर का पहला शतक जड़ा था तो उन्होंने भी 167 रनों की पारी खेली थी। जयवर्धने के डेब्यू शतक के दो साल बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी में जनवरी 2000 में VVS लक्ष्मण ने 167 रन बनाए। लक्षमण ने 198 गेंदों में 167 रनों की पारी खेली थी। इस पारी में उन्होंने 27 चौके लगाए थे। 

चौकाने वाली बात यह है कि अपने टेस्ट करियर में हमेशा जुझारू और धीमी पारी खेलने के लिए मशहूर लक्ष्मण ने अपना पहला शतक सिडनी में मात्र 114 गेंदों में ही पूरा कर लिया था। 167 रनों के साथ लक्ष्मण जयवर्धने के बाद डेब्यू शतक में एग्जैक्ट 167 रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए। 

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हालांकि लक्षमण के इस स्कोर के बावजूद भारतीय टीम 261 रनों पर सिमट गयी थी और ऑस्ट्रेलिया यह मैच पारी और 141 रनों से जीत गयी थी।  

देवदत्त पडिक्कल 2026

जिस मैदान पर जयवर्धने ने अपने डेब्यू शतक में 167 रन बनाये थे उसी मैदान पर 28 सालों बाद भारतीय बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने भी अपने करियर करियर के पहले शतक में 167 रन बनाए। इसके लिए उन्होंने 220 गेंदों का सामना किया। 

यह समानता इतनी सटीक है कि इसे महज संयोग नहीं माना जा सकता। गाले में जहाँ जयवर्धने ने अपना पहला शतक लगाया था, वहीं पडिक्कल ने भी अपना शतक पूरा किया। वही स्कोर जो लक्ष्मण ने अपने नाम किया था, एक बार फिर रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो गया।